GULMARG : आप कश्मीर घूमने आये और गुलमर्ग की गंडोला राइड नहीं कर पाये तो आपका सफर अभी अधूरा है। गुलमर्ग से कांगडोरी पहाड़ी और कांगडोरी से अफरवट तक दो फेस में बना एशिया का सबसे बड़े गंडोला आपको कश्मीर की खुबसुरत वादियों के बेहतरीन नजारें दिखायेगा । पढिए हमारी इस खास रिपोर्ट में ।
कश्मीर में जो भी टूरिस्ट आता है वो कश्मीर में गिरने वाली बर्फबारी को बेहद नजदीक से और सफदे चादर से ढकी वादियों को खुली आंखों से देखना चाहता है । यहां की खुबसुरत वादियों से आने वाली फिजाएं टूरिस्टों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यही कारण है कि गुलमर्ग का स्की रिजोर्ट जिसे केबल कार या फिर गंडोला भी कहते है। टूरिस्टों के लिए किसी रोमांच भरे सफर से कम नहीं है।
गुलमर्ग गंडोला का निर्माण फ्रांस की कंपनी पोमाग्लासकी ने 1998 में किया। ये इसका पहला फेज था, गुलमर्ग से कांगडोरी पहाड़ी तक 72 केबिन के साथ इसकी शुरूआत हुई थी जिसमें करीब एक बार में 1500 टूरिस्ट रोमांच से भरी इस राइड का मजा ले सकते थे।
2005 में गंडोला के दूसरे फेज की शुरूआत हुई कांगडोरी से अफरवट तक जिसमें 32 केबिन बनाये गये । इससे एक बार में 600 टूरिस्ट एक साथ राइड कर सकते है। गुलमर्ग गंडोला एशिया का पहला सबसे बड़ा गंडोला है, रोपवे या फिर आसान शब्दों में कहे कि केबल कार है जो कि समुद्रतल से करीब 13.5 हजार फुट ऊंचा है। इतनी ऊंचाई से बर्फ से ढ़की वादियों को देखना टूरिस्टों को एक अलग अनुभव देता है।
कश्मीर आने वाले प्रत्येक टूरिस्ट की सबसे पहली इच्छा यही होती है कि वो गुलमर्ग के गंडोला में एक बार जरुर बैठे। लेकिन कोविड के दौरान टूरिस्टों के लिए इसे बंद करना पड़ा था। लेकिन बीते तीन-चार महीने पहले टूरिज्म डे के दिन से ये लगातार टूरिस्टों को रोमांच से भरा सफर करा रहा है। गंडोला राइड से कश्मीर को अच्छा रिवेन्यू भी मिलता है। विदेशों से आने वाले टूरिस्टों का कहना है कि धरती पर ऐसा नजरा और कहीं भी देखने को नहीं मिलेगा। गुलमर्ग को देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने अपनी सारी खुबसुरती एक जगह पर रख दी है।
गुलमर्ग की गंडोला राइड का अनुभव यहां घुमने आये टूरिस्टों को सालों साल याद रहता है। एडवेंचर से भरा ये सफर विदेशों से आये टूरिस्ट हो या फिर स्थानीय लोग हो सभी को अच्छा लगता है।