Protest Against Mining : नागाबल और दीगम में अवैध रेत-बजरी खनन के खिलाफ गांव वालों का प्रदर्शन!

Written By Vipul Pal Last Updated: Mar 19, 2025, 12:33 PM IST

Jammu and Kashmir : शोपियां जिले के नागाबल, दीगम और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों ने अवैध रेत और बजरी खनन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बाहरी लोग भारी मशीनरी का इस्तेमाल कर नल्लाह रांबी आरा से बड़े पैमाने पर खनन कर रहे हैं, जबकि स्थानीय मजदूरों को इन संसाधनों से वंचित किया जा रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से दखल की अपील की है. उनका कहना है कि स्थानीय मजदूर आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी कमाई रेत और बजरी खनन पर निर्भर है. उन्होंने मांग की कि स्थानीय मजदूरों को कानूनी मंजूरी दी जाए.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहरी ठेकेदारों द्वारा भारी मशीनरी का अनियंत्रित उपयोग न केवल हमारी आजीविका छीन रहा है, बल्कि इलाके में पर्यावरणीय क्षरण भी हो रहा है. एक अन्य प्रदर्शनकारी ने निष्पक्ष नीतियों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यदि खनन की अनुमति है, तो इसका फायदा स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए, न कि केवल बाहरी लोगों को जो हमारे संसाधनों का शोषण करते हैं.

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया. उनकी मांग है कि रेत और बजरी खनन को नियमित किया जाए, जिससे प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता मिले. उन्होंने अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की भी मांग की, जो पर्यावरण और उनकी आर्थिक भलाई दोनों के लिए खतरा हैं.

यह मुद्दा केवल शोपियां तक सीमित नहीं है. देश के अलग अलग हिस्सों में अवैध रेत खनन एक गंभीर समस्या बन गई है. उदाहरण के लिए, राजस्थान में अवैध रेत खनन के मामलों में वृद्धि देखी गई है. हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को अवैध रेत खनन मामले में क्लीन चिट दी है, लेकिन राज्य में अवैध खनन की गतिविधियाँ जारी हैं.  

इसके अलावा, अवैध रेत खनन के कारण स्थानीय माफिया सक्रिय हो गए हैं, जो पर्यावरण और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई है. राजस्थान में अवैध रेत खनन पर जुर्माना दोगुना होने के बाद, रेत माफिया मंदसौर की सीमा से लगे क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं. यह दर्शाता है कि अवैध खनन एक व्यापक समस्या है, जो विभिन्न राज्यों में फैल रही है.

शोपियां के नागाबल और दीगम के निवासियों का यह विरोध इस बात का संकेत है कि स्थानीय समुदाय अपने अधिकारों और पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूक हैं. आवश्यक है कि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान दे और अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए. साथ ही, स्थानीय मजदूरों को कानूनी अनुमति और समर्थन प्रदान किया जाए, ताकि वे अपनी आजीविका सुरक्षित रख सकें और क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित हो सके.